कविता - "प्रकृति से सीख" – Yaksh Prashn – Shyam Kumar Kolare
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कविता – “प्रकृति से सीख”

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नन्ही सी चिड़िया ने सिखाया,

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ऊँचे उड़ते जाना

भँवरों के गुंजन ने सिखाया,

मस्त मगन हो गाना ।

झरना के कलकल ने सिखाया,

हरदम चलते जाना

नदियों की धारा से सीखा,

निरन्तर बढ़ते जाना ।

चलता पानी छनते रहता,

रुका हुआ धुंधलाता

चलने वाला मंजिल पाता,

ठहरा जो अवशर खोता ।

हवा का सरसर झौका,

बहुत कुछ सिखाता है

पेड़ो के पत्तो से मिलकर,

मधुर संगीत सुनाता है ।

प्रकृति के कण-कण में

बहुत सन्देश समाये है,

जीवन का ये ज्ञान दिखाते,

सीख बहुत से देते है ।

कवि / लेखक –
श्याम कुमार कोलारे
सामाजिक कार्यकर्ता
चारगांव प्रहलाद, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
#ShyamKumarKolare