“जीवन रस” – Yaksh Prashn
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“जीवन रस”

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वर्तमान बना सुखद घनेरा,

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भविष्य किसने है देखा

क्यों कुढ़ता मन भीत मनोरे,

मीनमेख निकलत ऐसा l  

जीवन का रस आज घनेरे,

पल-पल बीता जाए !

श्या जितना बटोर सके तो,

उतना सुख दिन आये l

नित्य दिन अंधकार बने है,

तिल-तिल घटता जाये

बिन पैरी समय चलत है,

कभी न थकता जाए l

घटत पहरी प्रीत न्यारी,

मनका फिरता जाए l

मन लागत जब प्रेम देहरी,

घट उज्यारा हो जाए l

प्रभु लगन जब लगी घट में,

नश्वर मोह भंग हो जाए l

श्या प्रीत प्रभु चरणों में,

स्थूल भ्रम दूर हो जाए l

कवि / लेखक –
श्याम कुमार कोलारे
सामाजिक कार्यकर्ता
चारगांव प्रहलाद, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)