कविता – “कोविड के बाद विद्यालय जीवन”
दुबके पाँव, कोरोना आया बच्चों को है, खूब सताया बन्द हुआ, हमारा स्कूल मुरझा गए, बागों के फूल। बन्द हुई , स्कूल पढ़ाई टीचर की है, याद सताई सहपाठी सब, हो गए दूर घर मे रहने, को मजबूर । नन्ही गुड़िया, समझ न पाये अब वो क्यो, स्कूल न जाये घर मे हो गए, बच्चे…
