“गुरु महिमा”
प्रथम गुरु मात-पिता को, महिमा बड़ी महान है, दीन्हों काया सरूप शरीरा, जगत में पहचान है । बिन विद्या नर पशु सामना, पावक बिन प्राण है, गुरु महिमा पड़ी जीव पर, धन्य हुई यह जान है । अक्षर ज्ञान की तपिश से, काया कर दी निर्मल, साक्षर कर ससक्त बना, कर दिए समर्थ सबल…
