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“गुरु महिमा”

प्रथम गुरु मात-पिता को, महिमा बड़ी महान है, दीन्हों काया सरूप शरीरा, जगत में पहचान है । बिन विद्या नर पशु सामना, पावक बिन प्राण है, गुरु महिमा पड़ी जीव पर, धन्य हुई यह जान है ।   अक्षर ज्ञान की तपिश से, काया कर दी निर्मल, साक्षर कर ससक्त बना, कर दिए समर्थ सबल…

“महिलाओं के कुशल प्रबंधन से सशक्त होता समाज”

कहते है कि… किसी भी कार्य में कुशल प्रबंधन होना बड़ा ही अहम होता है । बचपन से ही माँ, दादी एवं घर की महिलाये को अपने कार्य में कुशल पूर्वक कार्य करते देख सभी महिलाये अपने गृह प्रबंधन के कार्य में दक्षता प्राप्त कर लेती है । घर हो या दफ्तर अपने कार्य प्रबंधन…

“मेरे घर की बगिया”

आँगन में है छोटी बगिया, फूल लगे है सुन्दर सुन्दर, महके जब खुसबू इनकी, मुग्ध हुआ ये सारा घर, रंग बिरंगे पुष्प खिले है, कुछ कुशुम मुस्काती, तितली का बाजार लगे, जब फूलो पर मडराती l मोगरा केवड़ा चम्पा चमेली, गुलाब फुले है हँसती लिली, मेरी आहाट से दूब हँसें, तो झुइमुई है सरमाती लता…

“मेरी चाह”

आज कक्षा में बच्चो को हिन्दी विषय बच्चों को पढ़ा रहा था l बच्चों को बहुत पसंदीदा विषय था हिन्दी; आखिर रहे भी क्यों न ! उनके सर यानि मैं; बच्चों को पढ़ाने में अपना सम्पूर्ण दिलोदिमाग लगा देते है, हर एक गतिविधि को पूरे हावभाव से करते थे, कविता को लय के साथ, कहानी…