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कविता – “काँपते हाथ की लाठी”

वो झुका हुआ कमजोर कंधा,  धुंधली सी असहाय निगाहें, वो कांपते हुए मजबूर हाथ,  लिये हुए लाठी का साथ। निहार रहे किसी अपनों को,  वो मन में दबे सैकड़ों जस्बात, हमे भी मिले सहारा कोई कंधा, कोई थामे हमारा भी हाथ। आज ये झुक गए हमारे कंधे, कभी हुआ करते थे मजबूत, जिस पर बिठाकर…

कविता – “प्यारे बापू गाँधी”

आजादी का परवाना था, खादी ओढे रहता था सत्य अहिंसा के दम पर, अंग्रेजो को मार खदेड़ा था अडिक और निर्भीक जैसे  चट्टानों पहाड़ सा हिला न सके कोई भी, ऐसा मजबूत ठाव था । सादा जीवन उच्च विचार, धनी मन के बापू थे एक आवाज में चल दिए सब, ऐसे मेरे बापू थे स्वदेशी…

कविता- “समझें वृद्धों के जस्बात”

ओझल मन अकेलापन, झुर्रियों से सना शरीर आंख धंसी, धुंधलापन बहरापन कमजोर दांत नींद नहीं आंखों में करवट से बीतती है रात एक बोझिल सा चेहरा झिलमिलाती सी आंख । टिमटिमाती आशाएं अपनों से बहुत से अरमान बस कभी-कभी हल्की सी मुस्कान थोड़ी सी खुशियों में डूबने का अरमान जीवन भर बने अपनों के बने…

कविता – “श्रद्धा ही श्राद्ध”

पड़ा खाट पर बूढ़ा बाबा करा रहा है दे आवाज लगी भूख उदर जल रहा भोज अग्नि से कोई सींच बना कलेवा बाबा का ग्रहलक्ष्मी ले आई थाल पकवान देखकर मुस्काया   कैसे खाए नहीं थे दांत । मन रोया और तन थर्राया   बूढ़ी अवस्था की है भान जब युवा था तब तो मैंने …

कविता- “हिन्दी हिन्द की शान”

हिन्दी हमारी प्यारी भाषा, हिन्दी हमारी शान है हिन्दी से शुरू होती, हमारी सुबह शाम है ।   हिन्दी में बातें-बोली होती, आते सब जज्बात है हिन्दी की तो बात निराली, मधुर सलोनी तान है।   कोयल सी मधुर ध्वनि है, सीधी-सादी बहुत सरल है हम सब के ह्रदय में बसती, गंगा सी निर्मल धार है।   गागर में सागर भर…

कविता – “हिन्दी हमारी शान”

“हिन्दी हमारी शान“ ——————————– हिन्दी हिन्द की शान हमारी हिन्द धरा की आन हिन्दी भाषा माता जैसी समरसता की खान। हिन्दी का सम्मान करें हम हिन्दी मे काम करें हम हिन्दी का विस्तार बढ़े तो हिन्द का होगा नाम। हिन्द रहते हिन्दी आना गर्व की है बात हिन्दी मे ही निकलेंगे अन्दर के जस्बात। हिन्दी…

कविता – “प्रकृति से सीख”

नन्ही सी चिड़िया ने सिखाया, ऊँचे उड़ते जाना भँवरों के गुंजन ने सिखाया, मस्त मगन हो गाना । झरना के कलकल ने सिखाया, हरदम चलते जाना नदियों की धारा से सीखा, निरन्तर बढ़ते जाना । चलता पानी छनते रहता, रुका हुआ धुंधलाता चलने वाला मंजिल पाता, ठहरा जो अवशर खोता । हवा का सरसर झौका, बहुत कुछ सिखाता है पेड़ो…

कविता – दर्पण

कान्हा तेरी भक्ति में, जीवन है मेरा अर्पण।। ह्रदय में तुम बसे हो,ये है तुम्हारा दर्पण।। जब जब तेरे दर्श को मेरे नयन तरसते। मन में बसी सलोनी सूरत पे है ये मरते।। इस प्रेम की पुजारिन ने, कर दिया है समर्पण,, ह्रदय में तुम बसे हो,ये है तुम्हारा दर्पण।। अंतिम समय जो आये,यम दूत…

Madhu shubham pandey

कविता – “इन सा नहीं कोई दूजा”

माता-पिता की करूँण तपस्या प्यार स्नेह ममता की काया    जीवन पाठ पढ़ाने वाली इनके सिवा सब छल की माया लाड़ प्यार से दिए सहारे थामें रखा साथ हमारे हरदम ऊँगली थामे रखा है न डिगने दिया पैर हमारे । छोटी सी चोट लगी तो आह ! माँ के दिल से आई मेरे सपने पूरे करने…

कविता – “शिक्षक”

साधारण की एक शख्सियत, सच्चा सीधा सरल स्वाभाव, मुख मनोहर तेज भाल पर, नया नूतन ज्ञान के थाव । अनुशरण हम करें हमेशा समझ ज्ञान की है खान जीवन का ये पाठ पढ़ाए   देते हमें विद्या का दान । जीवन ज्ञान खूब बताये    इनकी हमें सीख भी भाये जीवन पूँजी नित्य बढ़ाए थाप देकर…