कविता – “प्यारे बापू गाँधी”
आजादी का परवाना था, खादी ओढे रहता था सत्य अहिंसा के दम पर, अंग्रेजो को मार खदेड़ा था अडिक और निर्भीक जैसे चट्टानों पहाड़ सा हिला न सके कोई भी, ऐसा मजबूत ठाव था । सादा जीवन उच्च विचार, धनी मन के बापू थे एक आवाज में चल दिए सब, ऐसे मेरे बापू थे स्वदेशी…
