MP News : पचमढ़ी अभयारण्‍य अब "राजा भभूत सिंह पचमढ़ी अभयारण्‍य" नाम से जाना जाएगा – Yaksh Prashn
Home » MP News : पचमढ़ी अभयारण्‍य अब “राजा भभूत सिंह पचमढ़ी अभयारण्‍य” नाम से जाना जाएगा

MP News : पचमढ़ी अभयारण्‍य अब “राजा भभूत सिंह पचमढ़ी अभयारण्‍य” नाम से जाना जाएगा

MP News : Pachmarhi Sanctuary will now be known as "Raja Bhabhut Singh Pachmarhi Sanctuary"
Share

MP News (यक्ष-प्रश्न) 3 जून 2025– आज कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पचमढ़ी अभयारण्‍य (Pachmarhi Sanctuary) को अब राजा भभूत सिंह पचमढ़ी अभयारण्‍य के नाम से जाना जाएगा। यह राजा भभूत सिंह के पर्यावरण प्रेम और पचमढ़ी को विदेशी ताकतों से संरक्षित रखने के आजीवन अथक प्रयासों को समर्पित है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

पचमढ़ी अभयारण्‍य (Pachmarhi Sanctuary) में राजा भभूत सिंह के जीवन, संघर्ष, वीरता और योगदान से संबंधित जानकारी को प्रदर्शित किया जाएगा। यह कदम न केवल स्थानीय गौरव को बढ़ावा देगा बल्कि अभयारण्‍य की पहचान को भी मजबूत करेगा। यह क्षेत्र के ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व का प्रतीक बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा भभूत सिंह का आदिवासी समाज पर बहुत अधिक प्रभाव रहा है। उनकी वीरता के किस्से आज भी लोकमानस की चेतना में जीवंत हैं। राजा भभूत सिंह के योगदान को स्मरण करने के लिए मंत्रि-परिषद की बैठक पचमढ़ी में आयोजित की गई है। यह राजा भभूत सिंह के योगदान को समाज के सामने लाने का एक प्रयास है।

राजा भभूत सिंह का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राजा भभूत सिंह सन् 1857 में आजादी की लड़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तात्या टोपे के मुख्य सहयोगी थे

अपनी छापामार युद्ध नीति के कारण ही भभूत सिंह नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते हैं। राजा भभूत सिंह को पकड़ने के लिए ही मद्रास इन्फेंट्री को बुलाना पड़ा था। राजा भभूत सिंह अपनी सेना के साथ 1860 तक लगातार अंग्रेजों से सशस्त्र संघर्ष करते रहे, अंग्रेज पराजित होते रहे।

अंग्रेज दो साल के बाद राजा भभूत सिंह को गिरफ्तार कर पाए और अंग्रेजो ने 1860 में उन्हें फांसी दे दी। राजा भभूतसिंह की वीरता और बलिदान को कोरकू समाज ने लोकगीतों और भजनों के माध्यम से जीवित रखा है।

पचमढ़ी क्षेत्र के गाँवों, मंदिरों और लोक संस्कृति में आज भी उनकी गाथाएँ सुनाई जाती हैं। राजा भभूतसिंह न केवल एक योद्धा थे, बल्कि वे जनजातीय चेतना और आत्मसम्मान के प्रतीक बन चुके हैं।

राजा भभूतसिंह की वीरगाथा, अंग्रेज अधिकारी एलियट की 1865 की सेटलमेंट रिपोर्ट में भी दर्ज है। राजा भभूतसिंह एक ऐसा नाम हैं, जो केवल कोरकू समाज का नहीं, पूरे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का गौरव है।

उनका जीवन आदिवासी अस्मिता, देशभक्ति, और आध्यात्मिक शक्ति का जीवंत उदाहरण है। राजा भभूत सिंह का जीवन अनुकरणीय है, उनके बलिदान और शौर्य की गाथा को राष्ट्रीय पटल पर लाना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस माह जून में अनुसूचित जनजाति आधारित तीन सम्मेलन आयोजित किए जायेगे। डिण्डौरी के बजाग में 7 जून को सम्मेलन, बिरसा मुण्डा दिवस पर शहडोल के ब्यौहारी में 9 जून को कोल सम्मेलन और 18 जून को शिवपुरी के कोलारस में सहारिया सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन-कल्याणकारी कार्यकाल के 11 वर्ष पूर्ण होने पर पूरे प्रदेश में 9 जून से 21 जून तक कार्यक्रम आयोजित किए जायेगे। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वायपेयी का जन्म शताब्दी वर्ष भी मनाया जाएगा। श्री वायपेयी का मध्यप्रदेश से गहरा नाता रहा है।

Connect Us- Yaksh Prashn

अपनी मौलिक रचना, लेख, विज्ञप्ति अथवा विज्ञापन प्रकाशित करने के लिये हमें मेल करें – yakshprashn1@gmail.com