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“साहित्य का सर्जन”

जब अंतर्मन में भावों का भंवर उमड़-उमड़ कर आये जब उमंग- तरंग जहन में उफन-उफन जाए तब लेखनी चलती है उसे साकार रंग में भरती है तब साहित्य का सर्जन करती है l सुख-दुःख , अनुराग- मिलन जब जलती हो विचारों की निर्मम आग जब सजनी सजती है लिए प्रिये मिलन की आस  तब अनायास ही लेखनी…

गोंडवाना के महान शासक राजा बख्त बुलंद शाह उइका ने बसाया था नागपुर शहर

संकलन- गोंडवाना इतिहास में नागपुर शहर की स्थापना गोंडवाना के महान शासक राजा बख्त बुलंद शाह उइका का जन्मदिन 30 जुलाई को मनाया गया l गोंड साम्राज्य की महान एवं पुरानी संस्कृति के संरक्षक और प्रगति के लिए गोंड शासको की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है गोंडवाना की स्थापना में इनका योगदान एवं संघर्ष भुलाया…

“दोस्ती”

ये मेरे दोस्त! मेरे सखा! मेरे हमदम! मेरे सुख-दुःख के साथी ! तेरे रहने भर से कट जाये जिन्दगी सारी l जब ग़मों के पहाड़ में खड़ा था अकेला   उस समय दिया तुमने हिम्मत का सहारा अपने जीवन में एक सच्चा दोस्त होना ही अपने आप में एक बहुत बड़ा सौभाग्य है l जब…

भारतीय भाषा पर अंग्रेजी के वर्चस्व से कमजोर होती भारतीय भाषाएँ

विचार- भारत एक बहुभाषी देश है जिसकी लगभग अट्ठारह भाषाओं के पास अपनी लिपि है और विश्व की सोलह बड़ी भाषाओं में पाँच बड़ी भाषाएँ भारत के पास हैं जिनके बोलने, पढ़ने-लिखने वालों की संख्या पाँच करोड़ से अधिक है, इसलिए अंग्रेजी के बढ़ते वर्चस्व की स्वाभाविक चिन्ता भारत को सर्वाधिक है और यह इसलिए नहीं कि…

“सबल बने अब हर नारी”

कब तक अबला बनकर धरती का बोझ उठाओगी, कब तक यूँ सहमे- सहमे अपना दर्द छुपाओगी, बाल रूप से वृद्धा तक रही किसी की छाया में, अब समय वो आया है अपने को सिद्ध कर पाओगी l  रानी लक्ष्मी दुर्गावती वीर नारी की वंशज हो तुम शक्ति रूप दिखाओगी, सक्षम होकर दुनिया में चावला बनकर…

“सावन आया झूम के”

ये सावन की बारिश, ये ठंडी फुहारे पड़े जब बदन में, ये सिहरन उठादे बादल गरजना, बिजली का चमकना छम-छम बूंदें, आसमान से टपकना करें मन मेरा, बारिश में भीग जाऊं नन्ही-नन्ही बूंदों से, दिन भर नहाऊ नदी का किनारा, कल-कल आवाजें   मन में मचादें, गजब के तराने l धरती ने पहना है हरियाली…

स्कूल प्रारंभ की तैयारी, उचित प्रबंधन के साथ हो पढ़ाई की शुरुआत

भोपाल – सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन के करीब 16 महीने से अधिक का समय गुजर गया है l इस समय आर्थिक मंदी के साथ-साथ बहुत ऐसे आयामों में मंदी आई है जिसे पूरा करने में काफी समय लगेगा l बात करें शिक्षा की तो, शिक्षा जगत इस मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है l शिक्षा…

Shyam Kumar Kolare: “नजरिया अपना- अपना”

Shyam Kumar Kolare : कविता- “नजरिया अपना-अपना” सूरदास निकालते है खामी मेरे चेहरे में,बेवफा को शिकायत है कि मैं दगा देता हूँ l कायर खोजते है परिश्रम मेरे जीवन में,शकी को शिकायत है कि मैं गलत देखता हूँ l लंगड़ा नुक्श निकालता है मेरी चाल में,लूला को शिकायत है मैं खराब चलता हूँ l मंदबुद्धि…

“बचपन की सुहानी यादें”

कोई लौटा दे वो बचपन के दिन दौडा करते थे सारा सारा दीन कभी टायरों के चक्कों के पीछे कभी उड़ते हवाई जहाज के नीचे रोज होती थी अमराई की सैर खाते थे झाडी की खट्टी मिट्ठी बेर l   कोई लौटा दे वो बचपन के दिन मस्ती करते थे सारे सारे दिन  खुश होते…

“गुरु महिमा”

प्रथम गुरु मात-पिता को, महिमा बड़ी महान है, दीन्हों काया सरूप शरीरा, जगत में पहचान है । बिन विद्या नर पशु सामना, पावक बिन प्राण है, गुरु महिमा पड़ी जीव पर, धन्य हुई यह जान है ।   अक्षर ज्ञान की तपिश से, काया कर दी निर्मल, साक्षर कर ससक्त बना, कर दिए समर्थ सबल…