Beti Ki Pehli Roti (Kavita)– Yaksh Prashn – Shyam Kumar Kolare- "बेटी की पहली रोटी"
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Shyam Kumar Kolare- “बेटी की पहली रोटी”

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कविता (यक्ष-प्रश्न) 9 जून 2025- Shyam Kumar Kolare- Beti Ki Pehli Roti (श्याम कुमार कोलारे-“बेटी की पहली रोटी”

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नन्हे हाथों ने पहली बार आटा गूंथा,
नन्हे हाथों ने आज रोटी बनाई है।
आज बेटी ने बाबा के लिए
पहली बार स्नेह से रोटी सजाई है।

कुछ छोटी, कुछ बड़ी रोटी है,
कुछ गोल, कुछ मोटी है।
रोटी में लिए प्यार भरी मिठास है,
अपने बाबा की तारीफ़ों की आस है।

माँ के हाथ का आसरा,
पिता की भूख में सहारा।
ये रोटी नहीं, बेटी का अपनापन है,
माँ की प्यारी, पिता का दुलार है।

ये पेट की भूख से ज़्यादा,
अपने बाबा की परवाह है।
ये हर बाप की आँखों का तारा,
माँ के हाथ थामने का सहारा है।

हर दादा की कहानी का किस्सा,
दादी की रसोई का किनारा है।
मन में उमंग, जीवन में तरंग,
हर घर की रौनक, आँखों का तारा है।

बेटी घर की अमिट रोशनी,
हर अंधेरे में दीपक-सा सहारा।
आज बेटी की रोटी ने जीवन में
उसके वजूद का अहसास कराया।

भले रोटी कुछ अधपकी-सी,
पर उसने आज भूख शांत कराई है।
आज चूल्हे की आँच में प्यार भर दिया,
बेटी की रोटी ने आज स्वाद बढ़ाई है।
Shyam Kumar Kolare

Shyam Kumar Kolare

सामाजिक कार्यकर्ता, एवं स्वतंत्र लेखक

छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश

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